मां श्रीदेवी पर बहुत ज्यादा निर्भर थी, उनके चले जाने के बाद कन्फ्यूज रहती हूं: जान्‍हवी कपूर

Bollywood

अपनी पहली फिल्म ‘धड़क’ की रिलीज के पहले ही जाह्नवी कपूर स्टार बन चुकी थीं और जब फिल्म रिलीज हुई तो उनका काम भी काफी पसंद किया गया। लॉकडाउन की शुरुआत में गुंजन सक्सेना की बायॉपिक से फिर चर्चा में आईं जाह्नवी इन दिनों 11 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज होनेवाली अपनी नई फिल्म ‘रूही’ के कारण खबरों में हैं। नवभारत टाइम्‍स से इस मुलाकात में वह अपने परिवार, मां श्रीदेवी, पिता बोनी कपूर, भाई अर्जुन कपूर और फिल्म की बातें करती हैं…

नए साल में आप और राजकुमार राव अपनी फिल्म ‘रूही’ के साथ सिनेमाघरों में आ रहे हैं। दर्शकों से क्या उम्मीदें हैं?

‘मैं दर्शकों से यही अपील करूंगी कि प्लीज मास्क पहने रहिए, सैनिटाइजर का इस्तेमाल करते रहिए और सारे एहतियात बरतिए लेकिन थिअटर में हमारी फिल्म देखने जरूर आइए। अब देखिए रेस्‍ट्रॉन्‍ट, लोकल ट्रेन और बसों में तो लोग जा रहे हैं। सिनेमा, फिल्म्स, थिअटर और टीवी हमारी संस्कृति और देश का बहुत बड़ा पहलू है। हम इसको मरने नहीं दे सकते हैं। अगर इसमें थोड़ा भी रिस्क होता तो मैं एक पब्लिक फिगर होने के नाते कभी नहीं कहती कि आप फिल्म देखने सिनेमाघरों में आएं, हमारी फिल्म को पैसे कमाने हैं। एंटरटेनमेंट हमें जोड़ता ही नहीं बल्कि कई लोगों का रोजगार इससे जुड़ा है।’

एक फिल्मी परिवार से ताल्लुक होने के नाते आपको अपने फिल्मी करियर में माता-पिता (श्रीदेवी-बोनी कपूर) का कितना फायदा मिला है?
‘बहुत फायदा होता है। घर पर हमेशा फिल्मों की चर्चा होती है। मम्मा (श्रीदेवी) के अनुभवों की बातें होती हैं। पापा प्रड्यूसर हैं तो मैं हमेशा परख पाती थी कि ऐक्टर्स के किस किस्म के बर्ताव से प्रड्यूसर्स को तकलीफ होती है। मुझे मम्मा के साथ शूट्स पर जाने का काफी मौका मिला। घर पर दुनिया की सबसे अच्छी एक्ट्रेस (श्रीदेवी) थी और दुनिया के सबसे दानवीर और समझदार प्रड्यूसर (पिता बोनी कपूर)। मैं बहुत खुशकिस्मत हूं कि मुझे उनके दिमाग का एक्सेस मिला है। बचपन से उनकी बातें सुनकर मेरे अंदर वर्क एथिक और जुनून बैठ गया है।’

श्रीदेवी की बेटी होना एक ऐक्ट्रेस के होने के नाते जिम्मेदारी भी है। आज उनकी कौन-सी चीजों को आप सबसे ज्यादा याद करती हैं?

‘मैं उनपर बहुत ज्यादा निर्भर करती थी। ऐसा था कि दुनिया कुछ भी बोले, अगर मेरी मम्मा ने अच्छा कहा है तो फिर यह अच्छा ही है। अभी थोड़ी-सी कन्फ्यूज रहती हूं। उनकी राय नहीं है तो 10 दूसरे लोगों से पूछती हूं, फिर भी वह चीज सही नहीं लगती है। हमेशा याद आता है कि वह होतीं तो ऐसा कहतीं, वैसा कहतीं। यह सच है कि पहले मेरे बारे में हर बात मॉम सोचती थीं, मैं बेपरवाह रहती थी मगर अब मुझे अपने बारे में सोचना पड़ता है।’

लॉकडाउन में आपकी बहन खुशी से बॉन्डिंग कितनी मजबूत हुई है?
‘हम एक-दूसरे को थोड़ा और जान गए हैं। मैं उसकी और ज्यादा इज्जत करने लगी हूं। वह जिस तरह से आत्मनिर्भर है, वह वाकई कमाल है। खुशी अपनी मान्यताओं और आस्था से कभी नहीं हिलती है। वह मुझसे, अंशुला दीदी (अंशुला कपूर), पापा और अर्जुन भैया (अर्जुन कपूर) से बहुत प्यार करती है। पहले वह अपनी धुन में रहती थी, शायद मुझे इतना एहसास नहीं होता था लेकिन लॉकडाउन के दौरान मुझे दिखा कि वह हमारे लिए कुछ भी कर सकती है।’

अर्जुन कपूर आपके लिए भाई होने के नाते बहुत ज्यादा प्रॉटेक्टिव महसूस कराते हैं, लड़कियां हमेशा अपने पिता, पति और बॉयफ्रेंड में यही गुण ढूंढती हैं?
‘जैसा मैंने कहा कि मैं खुद को बहुत भाग्यशाली समझती हूं। मेरा और अर्जुन भैया का रिश्ता काफी देर से बना, हम बहुत देर बाद एकसाथ आए और जुड़े। हमारा रिश्ता अब भी बन रहा है और दिन-पर-दिन गहरा होता जा रहा है मगर जिस तरह से उन्होंने हमें अपनाया है और जिस तरह का प्यार और सपॉर्ट हमें दिखाया है, उस चीज ने मुझे जिंदगी में बहुत हिम्मत दी है। सबसे बड़ी सीख जो मुझे अंशुला दीदी और अर्जुन भैया से मिली है, वह यह है कि वह हमें हमेशा प्रोत्साहित करते हैं कि आपको किसी की जरूरत नहीं है। वह कहते हैं कि आप सेल्फ कॉन्टेंट होने की कोशिश करो।’

क्या अब आपका पापा (बोनी कपूर) के साथ रोल रिवर्स हुआ है? अब आप उनका ध्यान कैसे रखती हैं?
‘उनको किसी की जरूरत नहीं है। इस पेशे में तो बिल्कुल भी नहीं। उनका दिमाग बहुत तेज है और हर चीज की समझ है। उनको बस लाड़ और प्यार की जरूरत है जो मैं उन्हें देती रहती हूं।’

लॉकडाउन से आपका टेक अवे क्या रहा?
‘हम में और इंसानियत और जग गई है। खुद के साथ इतना वक्त गुजारा है तो शायद मैं अपने आपको थोड़ा और जान गई हूं। यह भी जाना है अपने बारे में कि मुझे अकेले रहने से डर लगता है। मेरे पास एक घर था, खाना था और मेरा परिवार सुरक्षित था तो किस चीज के बारे में शिकायत करूं? लेकिन मैंने जो अपना साल देखा था, वह बदल गया था। मन में कई सोचें थीं। क्या वह साल वैसा जाएगा, मेरा करियर कैसे होगा, क्या हमारे रिश्ते बदल जाएंगे और क्या मैं अपने परिवार को हिफाजत से रख पाऊंगी या नहीं? हालांकि, बाकी लोगों की दिक्कतें तो बहुत बड़ी थीं कि मुझे खाना नहीं मिलेगा या नहीं? मैं इन हालातों में जी पाऊंगा या नहीं?’

फिल्म में आपका डबल रोल है, एक रूही का और दूसरा चुड़ैल का, इन्हें अदा करना कितना चुनौतीपूर्ण था?
‘शारीरिक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण था। रोज सुबह 2 घंटा प्रॉस्थेटिक मेकअप के लिए बैठना कठिन था और वह डरावनी आवाजें निकालना भी बहुत मुश्किल था। अगर आप मुझे एक साल पहले यह सवाल पूछतीं तो मैं आपको बहुत कुछ बताती। अभी तो यही याद है कि मेरी पीठ बहुत दुखती थी, प्रॉस्थेटिक मेकअप से बहुत खुजली होती थी और गले में काफी खराश होती थी क्योंकि हफजा (चुड़ैल का किरदार) के लिए तरह-तरह की आवाजें निकालनी पड़ती थीं।’

Janhvi Kapoor In Roohi


क्या आप सुपरनैचरल पावर में विश्वास करती हैं? रूही के सेट पर कभी कोई डरावनी घटना घटी?

‘नहीं, मैं डरती जरूर हूं मगर इन चीजों में विश्वास नहीं करती। मनाली शेड्यूल का पहला दिन था जहां हम एक सीन शूट कर रहे थे। एक ब्रेड का टुकड़ा गिरा और यह चीज कैमरे में रिकॉर्ड भी हुई कि वह टुकड़ा अचानक से ऊपर उछलकर नीचे गिर गया। हम इतना चौंक गए थे क्योंकि मेरे हाथ फ्रेम में नहीं थे। फिर लगा कि बाल में अटक गया होगा ब्रेड का वह टुकड़ा मगर बाल भी फ्रेम में नहीं थे। हम बहुत ज्यादा डर गए थे।’


Source link

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *