कोबरा कमांडो की रिहाई के लिए कवायद शुरू, आज छोड़ सकते हैं नक्सली!

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हाइलाइट्स:

  • छत्तीसगढ़ पुलिस ने कोबरा कमांडो की सुरक्षित रिहाई के लिए शुरू की कवायद
  • मध्यस्थों के जरिए बिना शर्त रिहाई की कवायद
  • पूर्व में नक्सलियों के कब्जे कई लोगों की रिहाई बिना शर्त हुई है
  • सूत्रों के अनुसार, जवान की रिहाई तक जवाबी हमलों में राहत

रायपुर
सीआरपीएफ के कोबरा कमांडो राजेश्वर सिंह की रिहाई के लिए अब कवायद शुरू हो गई है। जवान की रिहाई के लिए छत्तीसगढ़ पुलिस नक्सलियों के साथ वार्ता के लिए मध्यस्थों के जरिए रास्ता ढूंढ रही है। पुलिस की कोशिश है कि जवान को नक्सलियों के कब्जे से सुरक्षित छुड़ाया जाए।

सुरक्षा एजेंसी के सूत्रों ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि माओवादी भी बिना किसी नुकसान के कोबरा कमांडो को छोड़ना चाहते हैं। 22 जवानों की शहादत के बाद नक्सली एक मानवीय चेहरा प्रस्तुक करने के लिए उत्सुक हैं। साथ ही यह दिखाने की कोशिश करेंगे नक्सल विरोधी हमले को बेअसर करने के लिए यह हमारे लिए जरूरी था। बुधवार को नक्सलियों ने कोबरा कमांडो की एक तस्वीर जारी की है, जिसमें वह उनके कब्जे में सुरक्षित दिखाई दे रहे हैं। छत्तीसगढ़ पुलिस नक्सलियों से बात के लिए मध्यस्थों पर निर्भर है।

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दरअसल, कई मध्यस्थ पहले से ही सरकार और नक्सलियों के बीच कड़ी का काम करते रहते हैं। वह गुपचुप तरीके से जवान की रिहाई के लिए नक्सलियों के साथ बात कर रहे है। साथ ही बिना शर्त ही जवान की रिहाई पर चर्चा की संभावना है। एक पुलिस ने अधिकारी ने कहा कि पिछली घटनाओं से संकेत मिलते हैं कि माओवादी बिना किसी मांग के बंधक जवान को रिहा करने पर सहमत हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि नक्सलियों ने अभी तक किसी स्तर पर हमसे बात नहीं की है। पुलिस अधिकारी ने कहा कि संभव है कि गुरुवार तक नक्सली बंधक जवान को छोड़ दें।

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2017 में गलती से एक कनडाई नागरिक नक्सलियों के क्षेत्र में घुस गए थे। उसके बाद नक्सलियों ने उन्हें कब्जे में ले लिया था। बाद में बिना कोई शर्त रिहाई हुई थी। ऐसे में छत्तीसगढ़ पुलिस की कोशिश है कि कोबरा कमांडो की सुरक्षित रिहाई हो। सूत्र बताते हैं कि अब पुलिस ने जवाबी हमले से राहत दी है। नक्सलियों की कोशिश है कि जवान के जरिए हिडमा को सुरक्षित जगह पर पहुंचा दें।


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